राजेश तकयार का संसार
जीवनी
अध्ययन, लेखन और खोज से जुड़ा जीवन।
डॉ. राजेश तकयार का जन्म 1955 में जालंधर, भारत में हुआ। बाद में वे अपने माता-पिता के साथ दिल्ली आ गए, जहाँ उनका बचपन और आरंभिक जीवन बीता। नई दिल्ली में बड़े होते हुए उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें कम उम्र से आत्मनिर्भरता, दृढ़ता और जिम्मेदारी का महत्व सिखाया।
दिल्ली विश्वविद्यालय में बी.कॉम. (पास) की पढ़ाई के साथ उन्होंने अपने खर्च उठाने के लिए काम भी किया। संघर्ष और परिश्रम के इन वर्षों ने उनके स्वभाव और जीवन के प्रति दृष्टिकोण को आकार दिया। उनका मानना है कि बचपन की खुशियाँ आवश्यक हैं, लेकिन बड़े होने के साथ जिम्मेदारी स्वीकार करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्हीं के शब्दों में, “मैं आज जहाँ हूँ, वहाँ कठिनाइयों से बचकर नहीं, बल्कि उनका दृढ़ता से सामना करके पहुँचा हूँ।”
डॉ. तकयार अपनी उपलब्धियों का श्रेय केवल परिश्रम और लगन को नहीं, ईश्वर की कृपा को भी देते हैं। आज वे अपना अधिकांश समय पढ़ने, शोध, चिंतन और लेखन में बिताते हैं। भारतीय धर्म और दर्शन, विशेष रूप से पुराणों, वेदों तथा अन्य प्राचीन आध्यात्मिक ग्रंथों में उनकी गहरी रुचि है।
उन्होंने हिंदी और अंग्रेज़ी में 40 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उनकी पुस्तकों का प्रकाशन और वितरण पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के माध्यम से होता है।
हाल में उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के अठारह अध्यायों पर अठारह भागों की विस्तृत श्रृंखला लिखी है। लगभग 11.5 लाख शब्दों का यह कार्य उनके लंबे अध्ययन और लेखन का परिणाम है। लेखक इसे एक उल्लेखनीय विश्व रिकॉर्ड मानते हैं।
पुस्तक लेखन के अतिरिक्त, डॉ. तकयार ने विकिपीडिया के पृष्ठों को अधिक सटीक और उपयोगी बनाने के लिए भी पर्याप्त समय दिया है।
साहित्य, आध्यात्मिकता, धार्मिक अध्ययन और भारतीय ज्ञान परंपरा में योगदान के लिए उन्हें वर्षों से अनेक सम्मान मिले हैं। उन्होंने आत्मकथात्मक पुस्तक Diary Of A Monk (हिंदी में इन्वेंटिंग ड्रीम्स) भी लिखी, जिसे 2025 का गोल्डन बुक अवॉर्ड मिला। पूर्ण प्रोफ़ाइल