ब्रह्म
गीता के तेरहवें अध्याय से ‘जानने योग्य’ परम तत्त्व की व्याख्या।
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लेखक की शब्द-गणना · 18 खंड
डॉ. राजेश ने गीता के 18 खंडों में व्याख्या और चिंतन के लगभग 11.5 लाख शब्द लिखे हैं। लेखक द्वारा दी गई प्रत्येक खंड की गणना के अनुसार कुल 11,51,853 शब्द हैं।

लेखक · शोधकर्ता · विचारक
डॉ. राजेश के लेखन में श्रीमद्भगवद्गीता, श्रीकृष्ण और भारतीय शास्त्रों के विचार सरल भाषा में आधुनिक पाठक से संवाद करते हैं।
लेखक के बारे में
डॉ. राजेश भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं के स्वतंत्र शोधकर्ता और लेखक हैं। वेदों, पुराणों और श्रीमद्भगवद्गीता में उनकी विशेष रुचि है। उनका लेखन प्राचीन विचारों को आज के पाठक के लिए समझने योग्य और जीवन से जुड़ा बनाने का प्रयास है।
ब्लॉग और विचार



शास्त्रीय संदर्भों के सहारे एक सामान्य भाषा संबंधी प्रश्न पर विचार।
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